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आगे-आगे नृसिंह की घोड़ी, पीछे शान से निकली नृसिंह की जलेब राजा महेश्वर सिंह पालकी में सवार

Kullu Manali Headlines

आगे-आगे नृसिंह की घोड़ी, पीछे शान से निकली नृसिंह की जलेब राजा महेश्वर सिंह पालकी में सवार
ढालपुर की परिक्रमा कर भगवान नृसिंह ने बांधा रक्षा सूत्र, पहले दिन महाराजा कोठी के सात देवी-देवताओं ने लाव-लश्कर सहित लिया भाग
ढालपुर के चप्पे-चप्पे में गूंजे ढोल-नगाड़े, देवधुनों पर झूमे देवलू; जलेब देखने उमड़ा जनसैलाब
धनेश गौतम
कुल्लू। देव महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के पहले दिन ढालपुर में भगवान नृसिंह की जलेब शाही शान और पारंपरिक देव रीति-रिवाजों के साथ निकाली गई। आगे-आगे भगवान नृसिंह की घोड़ी चली और पीछे राजा महेश्वर सिंह पालकी में सवार होकर देवी-देवताओं के लाव-लश्कर के साथ जलेब का भव्य काफिला आगे बढ़ा। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच देवताओं के साथ देवलू झूमते रहे। भगवान रघुनाथ जी के मुख्य छड़ीबरदार एवं राजपरिवार के सदस्य महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार होकर जलेब में शामिल हुए। इस भव्य देव आयोजन को देखने के लिए ढालपुर में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा क्षेत्र देवमय हो उठा।
जलेब का शुभारंभ शाम करीब पांच बजे राजा की चानणी से हुआ। भगवान नृसिंह की घोड़ी सबसे आगे चली और उसके पीछे देवी-देवताओं तथा देवलुओं का काफिला निकला। जलेब कॉलेज चौक, पुराने एसबीआई पार्क और कला केंद्र के पीछे से होते हुए ढालपुर चौक पहुंची तथा परिक्रमा पूरी कर वापस राजा की चानणी में संपन्न हुई। जलेब के मार्ग में जगह-जगह लोगों की भीड़ जुटी रही। श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने इस अलौकिक देव दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया।
महाराजा कोठी के सात देवताओं ने बढ़ाई शोभा
भगवान नृसिंह की पहली जलेब में महाराजा कोठी के सात देवी-देवताओं ने अपने लाव-लश्कर सहित भाग लिया। इनमें पीज के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, जोंगा के गौरी देवता, लोट के देवता वीर कैला, जोंगा के देवता हुरगू नारायण, कमांद के देवता वीर कैला, पीज के देवता अजयपाल तथा खल्याणी के देवता पांचवीर बराधी शामिल रहे। देवी-देवताओं के साथ आए देवलुओं ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर नृत्य कर देव संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
ढालपुर की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधते हैं भगवान नृसिंह
कुल्लू दशहरा उत्सव में भगवान नृसिंह की जलेब का धार्मिक और पारंपरिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, भगवान नृसिंह की घोड़ी के आगे चलने और ढालपुर मैदान की परिक्रमा करने के साथ पूरे क्षेत्र में रक्षा सूत्र बांधा जाता है। स्थानीय देव मान्यताओं के अनुसार, इस परिक्रमा से ढालपुर क्षेत्र की नकारात्मक और बुरी शक्तियों से रक्षा होती है। इसी आस्था के चलते भगवान नृसिंह की जलेब को दशहरा उत्सव की महत्वपूर्ण देव परंपराओं में गिना जाता है।
देव महाकुंभ के पहले दिन निकली इस जलेब ने एक बार फिर कुल्लू की समृद्ध देव संस्कृति, राजपरंपरा और लोक आस्था का भव्य परिचय दिया। देवी-देवताओं के आगमन और पारंपरिक देव आयोजनों के बीच ढालपुर में दशहरा उत्सव की रौनक देखते ही बनी।