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दशहरा उत्सव का हुआ शुभारंभ, दशहरा समिति ने दी प्रदेश वासियों बधाई

Kullu Manali Headlines
कुल्लू, 21 अक्टूबर :  विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव-2026 का बुधवार को भगवान रघुनाथ जी की भव्य रथयात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। ढालपुर मैदान में आयोजित देव महाकुंभ में सैकड़ों देवी-देवताओं की उपस्थिति और लाखों श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस ऐतिहासिक आयोजन को भव्य बना दिया। भगवान रघुनाथ जी के जयघोषों से कुल्लू घाटी गूंज उठी और देवभूमि का ढालपुर मैदान आस्था, श्रद्धा और देव संस्कृति के रंगों से सराबोर हो गया। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने भी रथयात्रा में भाग लेकर इस अनूठी परंपरा के साक्षी बने।
कुल्लू दशहरा की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान रघुनाथ जी ने अपनी सहस्त्र सेना के साथ लंका पर चढ़ाई की। मान्यता के अनुसार, सात दिवसीय उत्सव के दौरान रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के अंत से जुड़ी परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा। इसी के साथ कुल्लू की अनूठी देव संस्कृति और लोक परंपराओं के इतिहास में एक और अध्याय जुड़ गया।
रथयात्रा से पहले सुल्तानपुर स्थित भगवान रघुनाथ जी के मंदिर में सैकड़ों देवी-देवताओं ने शीश नवाया। इसके बाद कुल्लू राज परिवार की राज्य दात्री माता हिडिंबा देवी के राजमहल पहुंचने पर परंपरानुसार रथयात्रा की तैयारियों और देव परंपराओं का निर्वहन किया गया। माता हिडिंबा के राजमहल पहुंचने के बाद भगवान रघुनाथ जी को पालकी में विराजमान कर रथ मैदान तक लाया गया।
रंग-बिरंगे परिधानों और सोने-चांदी के आभूषणों से सुसज्जित भगवान रघुनाथ जी के रथ में भगवान रघुनाथ, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमाओं को विराजमान किया गया। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना हुई और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच रथयात्रा शुरू हुई। सैकड़ों देवी-देवताओं की मौजूदगी में श्रद्धालुओं ने रघुनाथ जी के रथ को खींचा। इस दौरान पूरा ढालपुर मैदान जय श्रीराम और भगवान रघुनाथ जी के जयघोषों से गूंजता रहा।
रथयात्रा में शामिल होने के लिए प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे, जबकि देश-विदेश से आए पर्यटकों ने भी इस अनूठी देव परंपरा को करीब से देखा। देवी-देवताओं के सोने-चांदी से सुसज्जित रथ, पारंपरिक वेशभूषा और प्राचीन वाद्य यंत्रों की ध्वनि ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ देश और विदेश के मीडिया प्रतिनिधियों ने भी इस ऐतिहासिक आयोजन को अपने कैमरों में कैद किया।
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने उत्सव का शुभारंभ किया। इससे पहले उन्होंने विभिन्न देवी-देवताओं के दर्शन किए और भव्य रथयात्रा में भाग लिया। सात दिनों तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव में देव परंपराओं, लोक संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय लोकनृत्यों के विविध रंग देखने को मिलेंगे।
रथयात्रा के प्रथम दिन भगवान रघुनाथ जी को उनके अस्थायी शिविर में विधिवत विराजमान किया गया। इसके बाद देवी-देवता अपने-अपने अस्थायी शिविरों की ओर रवाना हुए। ढालपुर मैदान में सैकड़ों देवी-देवताओं के विराजमान होने से पूरा क्षेत्र देवमय हो गया है। भगवान रघुनाथ जी के अस्थायी शिविर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। अगले सात दिनों तक यहां विशेष पूजा-अर्चना होगी और विभिन्न देवी-देवता प्रतिदिन भगवान रघुनाथ जी के दरबार में हाजिरी भरेंगे।
उत्सव के दौरान प्रतिदिन रघुनाथ जी के शिविर में चंद्राउली का आयोजन होगा, जबकि राजा की जलेब भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी। छठे दिन मुहल्ले की परंपरा निभाई जाएगी और सातवें दिन लंका दहन के साथ दशहरा उत्सव की प्रमुख धार्मिक परंपराओं का समापन होगा